Monday, 2 July 2012

कल सुबह वही सूरज होगा


कल सुबह वही सूरज होगा जो आज हुआ है ओझल 
वही प्रदक्षिणा होगी नभ पर भर प्रकाश से झलमल 
थमे कदम फिर बढ़ जाएँगे, राह नई ढूँढ़ेंगे --
वे भाग्यवान होंगे जो कल की नई सुबह देखेंगे |


The Sun same will rise again tomorrow morn
The sky sparkling orbiters will adorn
Slowed steps will move fast to find new path
The fortunates ‘ll surely see the new morn.

बेदखली का दर्द


तब मेरा पहाड़ी गाँव पेड़ों की गोद में था 
और पेड़ जंगल की गोद में 
तोतों-खरगोशों-गिलहरियों से मेरी पहचान बहुत पुरानी है
वहीँ किसी चोटी गुफा या झुरमुट में 
कैद है मेरा मन आज भी |
वहीँ किसी चीड़-वन से सीखा था सांस लेना 
देवदार और बांज वृक्ष से लुकाछिपी सीखी थी 
हरियाली ने सौंपी थीं कवितायेँ, झरने ने गति, स्वर और –
और बहुत कुछ बहुतों ने | 
गाँव अभी भी वहीँ है, बस गोद छीन गई है उसकी –
टहनियाँ टूट-गिर गईं ...तिनके उड़ गए 
घोंसले की जगह पहचानना आकाशबेल की जड़ पहचानना हो गया 
मुझे अब न तोते पहचानते हैं, न खरगोश 
न गिलहरियाँ न तितलियाँ 
अपनी बेदखली का जिम्मेदार वे मुझे ही मानते हैं |