Thursday, 18 July 2024

प्रेत चर्चा

किसी ने पूछी है प्रेत की व्युत्पत्ति।

(फोटो सौजन्य Wikicommons)


प्रेत [प्र+√इ(जाना)+क्त], परेत [परा+√इ+क्त]; इस संसार से गया हुआ, मृत, और्ध्वदेहिक क्रिया (मरणोत्तर कर्म) संपन्न किए जाने से पूर्व जीव की अवस्था। नरकस्थ प्राणी। (The departed spirit, the spirit before obsequial rites are performed, deceased).
नरकस्थ प्राणी पर शंका आई कि प्रेत को "नरकस्थ प्राणी" कैसे कहा गया, जब कि यह तो भटकने वाली योनि मानी गई है जिसकी कतिपय कारणों से मुक्ति न हो सकी हो !'
दरअसल प्रेतावस्था एक प्रकार से मुक्ति से पहले का ठिकाना कही जा सकती है। सनातन विश्वास के अनुसार मृत्यु के बाद सपिण्डीकरण या लोकाचार के अनुसार अन्य विहित कर्म सम्पन्न होने के बाद उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और कर्मानुसार 'स्थान' भी। अमरकोष में उल्लिखित प्रेत के अनेक पर्यायों में से एक "नरकस्थप्राणी" भी है।
जानना रोचक होगा कि हमारे पुराणों और अन्य अनेक ग्रंथों में प्रेत की पारलौकिक  व्याख्या से अधिक इहलौकिक लक्षण गिनाए गए हैं। जीवित प्रेत के बारे में बहुत सामग्री है। उन लक्षणों के अनुसार तो हम सब भी किसी ने किसी रूप में जीवित प्रेत ही हैं।