नीम हकीम ख़तरा-ए-जान
आँगन के नीम में ताँबई कल्ले फूटने लगे हैं। बस सप्ताह भर में हरा-भरा छतनार हो जाएगा। उसके बाद छोटी-छोटी मंजरियाँ और निमोलियाँ। नीम भारत में सर्वत्र पाया जाता है और अनेक प्रकार से लाभदायक पेड़ माना जाता है। कहते हैं कि इसका प्रत्येक अंग उपयोगी और चिकित्सकीय गुणों से भरपूर होता है। इसलिए आयुर्वेदिक और देसी इलाज में नीम का बहुत महत्त्व है।
लोक में एक बड़ी प्रसिद्ध कहावत है- 'नीम हकीम ख़तरा-ए-जान'। सामान्यतः नीम से होने वाले देसी इलाज को लेकर इस कहावत का अर्थ जो लगाया जाता है, वह सही नहीं है। ग़लत अर्थ आमतौर पर वे लोग बताते हैं जो कहावत के संदर्भ में नीम के वास्तविक अर्थ नहीं जानते। वे कहते पाए जाते हैं— जो हकीम हर रोग के लिए नीम नामक वनस्पति की दवा बताता है उससे जान ख़तरे में आ सकती है। एक सीमा तक उनकी बात सही भी है कि नीम का काढ़ा पीने, नीम की पत्तियाँ चबाने, नीम की चटनी चाटने, जड़ों को उबालकर पीने, छिलके को घिसकर लगाने, नीम के फल-फूल या कोंपलों का सेवन करने आदि से हर रोग का इलाज नहीं हो सकता। स्पष्ट है कि कहावत की व्याख्या नीम के सही अर्थ पर नहीं टिकी है।
दरअसल कहावत का नीम देसी नीम नहीं , फ़ारसी नीम है। फ़ारसी में नीम का अर्थ है थोड़ा, कम, अपर्याप्त, अधूरा। जैसे: नीम गर्म- कम गर्म, नीम होश- आधा बेहोश, नीम मुर्दा - अधमरा, नीम उम्र- अधेड़, नीम दिली- आधे मन से। इसलिए नीम हकीम का अर्थ होगा, अनाड़ी और कम पढ़ा लिखा हकीम, कठवैद्य, अज्ञानी चिकित्सक, अधूरा हकीम, अनपढ़ वैद्य, half-baked medicaster, जिसे आजकल चलताऊ भाषा में 'झोला छाप डॉक्टर' या quack भी कहा जाता है।
आगे समझाने की आवश्यकता नहीं है कि ऐसे चिकित्सक से चिकित्सा कराना अपनी जान को संकट में डालना क्यों है।
अब यह बात और है कि दुर्भाग्य से अकुशल हाकिम-हुक्काम, अनपढ़ नेता-मंत्री देश को चला रहे हैं। चारों ओर नीम हकीम बिखरे हैं, इसलिए जान तो ख़तरे में रहनी ही है।
तो कहावत सही बनी है- नीम हकीम ख़तरा-ए-जान।