आइए, चाय पिएँ
धैर्यपूर्वक, फुरसत में
सम्मान देते हुए इसे
कुछ ऐसे कि जैसे यही वह धुरी है
जिसके सहारे घूमती है पूरी दुनिया
धीरे -धीरे, स्थिर गति से
अतीत बीत गया
अनागत जाने कब आए
उसे लपकने की त्वरा क्यों
बस, यही पल सचमुच है जीवन
आइए इस पल को जिएँ,
आइए, चाय पिएँ।