Saturday, 29 November 2025

बेपेंदी का लोटा

बेपेंदी का लोटा कहावत जिस लोक ने बनाई होगी उसने लोटे के गुण-दोष बहुत निकट से देखे-परखे होंगे। लोटे में जल लेकर रसोई-चौके में भोजन करने बैठे। निवाला गले में फँसा। कठिनाई से हिचकी रोकते हुए आपने लोटा उठाना चाहा, और देखा कि वह तो दूसरी ओर लुढ़का हुआ है। पड़ गई जान संकट में।
एक दूसरी स्थिति उस युग की सोचिए जब आँगन वाले सरकारी शौचालय या शयनकक्ष से चिपके शौचालय नहीं थे और आप लोटा-ए-आज़म मिर्जापुरी को लेकर किसी झाड़-झंखाड़ या टीले की आड़ में हो लेते थे। लोटा अटकाकर आप कर्म निवृत्ति के लिए बैठे। जब ज़रूरत हुई, लोटे के निकट आए तो देखा बेपेंदी का बादशाह तो लुढ़का पड़ा है! निदान "आतुरे मर्यादा नास्ति" अर्थात संकट के समय मर्यादा या नैतिकता का पालन आवश्यक नहीं रह जाता है, क्योंकि उस समय व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य अपनी जान बचाना या संकट से बाहर निकलना होता है। तो संकटकालीन शास्त्रीय विधान का अनुपालन करते हुए आपको घास-पात पोछन या माटी घिस्सन का सहारा लेना पड़ता है। हमारे एक कक्का जी तो कहा करते थे कि ऐसे संकट के समय तीन बार "दक्षिण कर्ण" (दायाँ कान) का स्पर्श कर लेना पर्याप्त है क्योंकि दाहिने कान में गंगा का वास होता है!बेपेंदी के लोटे के न रहने से ऐसे अनेक संकटकालीन काव्य रसों का स्थायीभाव ही विलुप्त हो गया।मुहावरे के रूप में बेपेंदी का लोटा का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो अपनी राय को परिस्थिति के अनुसार लुढ़ककर बदलता रहता है और जिसका कोई स्थायी रुख या सिद्धांत नहीं है। अपनी सुविधा के अनुसार पक्ष बदलता रहता है। ऐसे लोटे राजनीति में खूब देखे जाते हैं।नई पीढ़ी ने संभवतः ऐसा लोटा ही न देखा हो तो उसे मुहावरा समझाना कठिन है। हाँ, मानव शरीर धारी बेपेंदी के लोटे के गुण-कर्म-स्वभाव की चर्चा करके समझाया जा सकता है।बेपेंदे का लोटा के समतुल्य एक अन्य मुहावरा है– थाली का बैंगन होना।
बैंगनों के बारे में फ़िर कभी……!

Monday, 3 November 2025

इन्हें सँभाले रहना

(फोटो सौजन्य – अलका जोशी कौशिक, अभी ट्विटर पर इस चित्र को देखकर यह लिखने का मन हुआ)

नीलम-सा नभ और सजी 

हीरक मणि पर्वतमाला

मरकत-जैसे लहराते वन, 

ज्यों आँचल हरियाला


यह पुखराजी धूप दमकती

बिल्लौरी आँगन में
जाने कितनी यादें 

उमड़-घुमड़ आती हैं मन में

 
जन्मा यहीं, यहीं खेला हूँ, 

पड़ा दूर पर रहना
नया जन्म लेकर आऊँगा– 

इन्हें सँभाले रखना!

💚