नीलम-सा नभ और सजी
हीरक मणि पर्वतमाला
मरकत-जैसे लहराते वन,
ज्यों आँचल हरियाला
यह पुखराजी धूप दमकती
बिल्लौरी आँगन में
जाने कितनी यादें
उमड़-घुमड़ आती हैं मन में
जन्मा यहीं, यहीं खेला हूँ,
पड़ा दूर पर रहना
नया जन्म लेकर आऊँगा–
इन्हें सँभाले रखना!
💚
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