Monday, 3 November 2025

इन्हें सँभाले रहना

(फोटो सौजन्य – अलका जोशी कौशिक, अभी ट्विटर पर इस चित्र को देखकर यह लिखने का मन हुआ)

नीलम-सा नभ और सजी 

हीरक मणि पर्वतमाला

मरकत-जैसे लहराते वन, 

ज्यों आँचल हरियाला


यह पुखराजी धूप दमकती

बिल्लौरी आँगन में
जाने कितनी यादें 

उमड़-घुमड़ आती हैं मन में

 
जन्मा यहीं, यहीं खेला हूँ, 

पड़ा दूर पर रहना
नया जन्म लेकर आऊँगा– 

इन्हें सँभाले रखना!

💚

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