भोली मछलियां 'देस' की यह सोचती थीं
ताल उनका घर
यहाँ वे चैन से जीवित रहेंगी
पर अचानक ताल से उनको उलीचा यों गया है
तड़पना, मरना, कुचलना नियति उनकी बन गया है
जो समझतीं ताल है उनका
वे ही अचानक
क्यों पराई हो गई हैं ?
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समय बदलेगा
उगेगा नया सूरज
स्वर्ण के व्यापारियों को मिलेंगे अब ताल
एक दिन वे सरोवर में बदल जाएँगे
भरेगा जल नव्य नीलम-सा चमकता
खिलेंगे कमल मनभावन
सोनमछरी की फसल लहराएगी,
कारगर की कारसाजी भी गजब है !
