Tuesday, 19 August 2025

क्या पुल्लिंग अशुद्ध है

पुल्लिंग <—> पुलिंग 
[वरिष्ठ पत्रकार भाई ओम थानवी जी की एक फेसबुक पोस्ट के संदर्भ में]

पुल्लिंग पुंस (नर) के लिंग (चिह्न) के अर्थ में रचा गया हिंदी का अपना सामासिक शब्द है।
 कुछ अन्य रूप जो दिखाई पड़ रहे हैं और शुद्ध बताए जा रहे हैं, उनमें पुर्लिंग बनेगा नहीं। पुंल्लिंग का उच्चारण नहीं हो सकता, इसलिए असिद्ध। पुँल्लिंग बोला जा सकता है किंतु मकार को अनुनासिक बनाने का नियम कम-से-कम मुझे मालूम नहीं है। 

स्रोत भाषा संस्कृत में पुल्लिङ्ग के स्थान पर पुंलिङ्ग शब्द का प्रयोग किया जाता है। 
"पुंलिङ्गा इव नार्य्यस्तु स्त्रीलिङ्गाः पुरुषाभवन्।" 
(~ महाभारत)

यदि संस्कृत वर्तनी ही शुद्ध होती हो तब तो पुल्लिंग अशुद्ध है, किंतु हमें यह भी देखना होगा कि हिंदी संस्कृत से बहुत आगे निकल आई है। उसका अपना व्याकरण कुछ ऐसा भी है जो संस्कृत से पूरा-पूरा मेल नहीं खाता। उसे बार-बार संस्कृत के व्याकरण में क्यों जकड़ा जाए। सैकड़ों शब्द ऐसे हैं जो वर्तनी, लिंग, अर्थ आदि में संस्कृत से भिन्न हैं या एकदम विपरीत हैं। भिन्न लिंग का ही एक उदाहरण देना चाहूँगा–
देवता- (संस्कृत में स्त्रीलिंग, हिंदी में पुल्लिंग) ।
आत्मा (संस्कृत में पुल्लिंग, हिंदी में स्त्रीलिंग)।

तद्भव रूप में विकसित हुए शब्दों में पुल्लिंग मेरी जानकारी में एकमात्र ऐसा शब्द है जिसमें अनुस्वार का ल् में परिवर्तन दिखाई पड़ता है। व्याकरण से भाषा बनती नहीं, सँवरती है और व्याकरण का अनुशासन भाषा के समकालीन प्रयोगों की अनदेखी नहीं कर सकता। लोकसिद्ध को असिद्ध भी नहीं ठहराया जा सकता।

यह मेरे विचार हैं। चर्चा से इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है और सुधार किया जा सकता है।

Monday, 11 August 2025

नाम में क्या रखा है

नाम में क्या रखा है
आजकल नएपन की दौड़ में आगे निकलने के लिए प्रायः निरर्थक और हास्यास्पद नए-नए अनेक नाम प्रचलन में हैं। इनमें से अनेक तो महापंडित गूगलानंद द्वारा समर्थित बताए जाते हैं। ऐसे नामों की सूची में कुछ लोग "तनिष्क" की गणना भी करते हैं।

तनिष्क निरर्थक नहीं, नव निर्मित है। संभव है विज्ञापन की भाषा में सायास बन गया हो। हमारा विचार है कि यह तनिष्क दो घटकों से बना 'पोर्टमेंट्यू' शब्द है और सार्थक है। 'निष्क' का अर्थ है सोने का सिक्का, दीनार, अशर्फी। अमरकोष के अनुसार 
दीनारेऽपि च निष्कोऽस्त्री (३.३.१४)
मनुस्मृति में– चतुःसौवर्णिको निष्को (८.१३७)
 चार माशा भार के स्वर्ण को भी निष्क कहा गया है। पंजाबी में इसका अपभ्रंश आज भी विद्यमान है– निक्का (=छोटा सिक्का, पैसा)।

तनिष्क में निष्क से पहले जो /त/ दिखाई पड़ रहा है वह तनिष्क के स्वामित्व वाली कंपनी टाटा के नाम का पूर्वार्ध है- ta ट => त। इसलिए पूरा नाम हो गया तनिष्क। अर्थात टाटा का निष्क (लक्षणा से टाटा कंपनी का स्वर्ण व्यवसाय)। 
इसलिए यदि अशर्फी लाल, स्वर्ण कुमार जैसे नाम हो सकते हैं तो तनिष्क क्यों नहीं!

एक बात और। आवश्यक नहीं कि विज्ञापन बनाने वाली कंपनी के कॉपीराइटर ने उपर्युक्त सारी परिभाषाओं और संभावनाओं पर विचार किया हो। 

एक और संभावना विचारणीय है। शब्द की अंग्रेजी वर्तनी Tanishq के अंत में Guttural /q/ (कंठ्य /क़/) है। इसलिए अधिक बौद्धिक व्यायाम में न पड़ते हुए तनिष्क के सीधे-सीधे दो खंड होंगे– तन (फ़ारसी)+ इश्क़(अरबी), बदन से प्यार। अर्थ संकेत यह कि अपने शरीर से प्रेम करने वाले आभूषणों से अधिक प्यार करते हैं। इस दृष्टि से भी स्वर्ण आभूषणों की निर्माता कंपनी के लिए Tanishq (तनइश्क़) नाम अधिक उपयुक्त लगता है।