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प्यार प्रकृति की ओर से मनुष्य को दी गई संभवतः पहली और सबसे अनूठी सौगात है। यह एक ऐसी भावना है जो आदिम युग से लेकर आज तक जीवित है, न केवल मानवों में, बल्कि प्रकृति के अन्य जीवों में भी। प्यार का यह बंधन जीवन को संजीवनी प्रदान करता है और समाज को जोड़ने का कार्य करता है। इसके बिना, जीवन की कल्पना करना भी कठिन है। आधुनिक युग में, तकनीकी विकास के साथ-साथ यांत्रिक मनुष्य में भी प्यार के भावों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि चाहे कितनी भी प्रगति कर लें, प्यार की गहराई और उसकी महत्ता कभी कम नहीं होगी। यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे संबंधों का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा। इसलिए, प्यार का यह रूप और उसकी संवेदनशीलता हमें सिखाती है कि हम अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें और एक-दूसरे के प्रति कितने संवेदनशील रहें।
विश्व की सभी ज्ञात और अज्ञात भाषाओं में प्यार अभिव्यक्त करने के लिए कोई न कोई विशेष शब्द या वाक्यांश होता है, जो इस गहन भावना को व्यक्त करता है। हालांकि वाचिक भाषा सबसे आम विधि है, लेकिन प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए कई अन्य रचनात्मक तरीके भी हैं। जैसे, प्रेमपत्र लिखना, कविता के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करना, चित्र या कला के जरिए अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करना, या प्रेम गीत गाना। इन सभी माध्यमों से हम अपने हृदय की कोमलतम भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त कर सकते हैं, जो प्यार की गहराई और जटिलता को समझने में मदद करते हैं।
सौभाग्य से आज एक आंकिक अभिव्यक्ति ज्ञात हुई जिसका उपयोग प्यार का इजहार करने के लिए किया जा रहा है। इस कूट शब्द से कितने लोग इज़हार-ए-'आशिक़ी कर रहे हैं, यह सांख्यिकी विभाग का विषय है और जैसा कि आप जानते हैं, मैं गणित में बहुत पैदल हूँ।मैं इस दुविधा में भी हूँ कि इसे शब्द कहूँ या संख्या! यहाँ एक विशेष संख्या शब्द की बात की जा रही है जो कूट भाषा का-सा लगता है:
शब्द है १४३ (= ILU) !!
इलू तक तो अपनी समझ अपने प्राचीन काल में बन गई थी, (फिल्म सौदागर दिलीप कुमार, राजकुमार)। भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से इलू एक परिवर्णी शब्द है जो अंग्रेजी अभिव्यक्ति "आई लव यू" के आद्यक्षरों से बना है, लेकिन यह १४३ एकदम नया लगा। हो सकता है अपन यहाँ पहुँचने में भी लेट हो गए हों। ऐसे मौकों के लिए प्रसिद्ध शायर मुनीर नियाज़ी साहब कह तो गए हैं:
"बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो
किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं"।
जो भी हो, प्रत्येक ज्ञात शब्द से इलू कहने वाले मुझ-जैसे दिलफेंक के सामने समस्या यह है कि आने वाले समय में यदि इसे कोई शब्दकोश में स्थान देना चाहे, तो अकारादि क्रम निर्धारण करने में बड़ी कठिनाई होगी। किसी कोष विज्ञानी के पास संभवतः इसका कोई व्यावहारिक उपाय हो। तब तक इसे फुटकर प्रविष्टि समझ लीजिए। आम खाने वाले गुठलियाँ नहीं गिना करते।
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©सुरेश पंत
(सितंबर 24, 2024)