नान फ़ारसी मूल का शब्द है। तंदूर में पकाई जाने वाली मोटी खमीरी रोटी। नानवाई नान रोटी पकाने, बेचने का व्यवसाय करने वाला, नान-फ़रोश। मध्य पूर्व के देशों में रोटियों की दुकानें बहुत दिखाई पड़ती हैं। नान खताई एक प्रकार के 'कुकीज़' होते हैं जो भारत और पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय हैं।
नानमाश उरद के आटे की छोटी और फूली हुई रोटी, कचौरी को कहते हैं। डबल रोटी को नान पाव भी कहा जाता है।
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हलवा, हलुआ अरबी मूल का शब्द है। सामान्यतः आटा, मैदा, सूजी, मूँग आदि दालों की पिट्ठी या गाजर आदि को भूनकर बनाया जाने वाला विशेष मीठा पकवान 'हलवा' कहा जाता है। अर्थ विस्तार से खोवा, घी, शक्कर, मेवा और मैदा , बेसन आदि से बने वे सारे खाद्य पदार्थ हलवे की अर्थ परिधि में आ जाते हैं जिन्हें मिठाई कहा जाता है।
हलवाई हलवा बनाने-बेचने वाला, मिठाई वाला।
आजकल नानबाई शब्द के कम व्यवहार का कारण नान और मिठाई की लोकप्रियता में अंतर मान सकते हैं। नान के नाम पर अब दो ही खाद्य पदार्थों को लोग जानते हैं नान रोटी और नान खताई । विशेष कर जम्मू कश्मीर, पंजाब और आसपास के क्षेत्र के लोगों में अधिकतर इसके शौकीन मिलेंगे। नान का व्यवसाय अलग से नहीं रहा। जिन्हें नान रोटी प्रिय लगती है वे लोग अपने-अपने घरों में बना लेते हैं या तंदूर, ढाबे से ले आते हैं। होटलों में ग्राहक के अनुरोध पर बना दी जाती है किंतु उसके लिए कोई अलग से नानबाई नहीं रखा जाता। तंदूरी रोटी बनाने वाला रसोईया नान भी बना लेता है। नानखताई भी बिस्किट बनाने वाली बेकरी से मिल जाती है।
नानवाई व्यवसाय नहीं रहा, इसलिए नानवाई शब्द खो गया। हलवा और मीठा सबको प्रिय है, इसलिए हलवा (मिठाई) वाले हलवाई का बोलबाला है।