पाखंड (hypocrisy)
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"पालनाच्च त्रयीधर्म्मः पाशब्देन निगद्यते।
तं खण्डयन्ति ते यस्मात् पाखण्डास्तेन हेतुना॥"
त्रयीधर्म का अर्थ है तीनों वेदों द्वारा निर्धारित आचरण न करना, धर्म का खंडन करना अर्थात वेद विरुद्ध आचरण। इसे ही पाखंड कहा गया है।
मॉनियर विलियम्स के अनुसार वह धर्म विरुद्ध आचरण करने वाला हिंदू पाखंडी है जो बाहरी धार्मिक चिह्न तो धारण करता है किंतु कार्य वेद विरुद्ध करता है। (a heretic, heterodox Hindū, adopting the exterior marks of the classes, but not respecting the ordinances of the
Vedas.)
भक्ति या उपासना जो केवल दूसरों के दिखाने के लिये की जाय और जिसमें कर्ता की वास्तविक निष्ठा अथवा श्रद्धा न हो, बुरे हेतु से ऐसा काम करना जो अच्छे इरादे से किया हुआ जान पड़े। ढोंग, आडंबर, ढकोसला, बगुलाभक्ति, यह सब लक्षण पाखंड के अंतर्गत आते हैं ।
श्रीमद्भागवत में एक कथा आती है कि एक विमुक्त संन्यासी बनकर देवराज इंद्र महाराज पृथु के घोड़े को चुरा कर ले जा रहा था तो भगवान अत्रि ने भगवा वस्त्र और नकली जटाजूट पहने इंद्र के पाखंड को पहचान लिया।
संन्यासी जैसी भगवा वेशभूषा धारणकर वेद विरुद्ध कर्म करना भी पाखंड है। पाखंड का भाँडा एक दिन फूटता ज़रूर है, चाहे इंद्र का ही क्यों न हो।
सुरेश,
४जून, २०२४
Tuesday, 4 June 2024
पाखंड
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