उस्तरे या ब्लेड से गाल, होंठ, ठोड़ी पर उगे बालों को छील-छालकर साफ़ करने के लिए हिंदी में दाढ़ी 'बनाना' क्रिया है जब कि इसमें 'बनाने' जैसा कुछ भी नहीं। इसके विपरीत इसके अंग्रेजी पर्याय shaving में शाब्दिक अर्थ बना रहता है, " to remove the hair or beard off with a razor." (OED)
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संस्कृत में दाढ़ी-मूँछ को श्मश्रु कहा जाता है और इन्हें काटने-बनाने वाले कारीगर (नाई, barber) को संस्कृत में नापित कहते हैं। नापित सेे ही हिंदी आदि अनेक भाषाओं में 'नाई' शब्द बना है।
नापित (नाई) का एक रोचक पर्याय है- 'श्मश्रुवर्धक' (आप्टे)। श्मश्रुवर्धक का शाब्दिक अर्थ है– दाढ़ी (श्मश्रु) को बढ़ाने वाला (वर्धक), दाढ़ी को पाल-पोसकर बड़ा करने वाला। यह कुछ-कुछ ऐसा ही है जैसे दिया बुझाने को कहा जाता है– दिया बढ़ाना। अन्य पर्याय हैं– वपन, परिवापन, भद्राकरण आदि। वपन, परिवापन भी वप् धातु से बने हैं जिसका मूल अर्थ है बोना, उगाना। वप् से ही बाप बना है! चौंकिए नहीं, कुछ भाषा प्रयोग बड़े रोचक होते हैं।
इस काम के लिए एक अन्य शब्द क्षौर कर्म भी है। क्षौर कर्म के अंतर्गत मुंडन के साथ-साथ अनेक क्रियाएँ आ जाती हैं, केशश्मश्रुनखादीनां कर्त्तनं संप्रसाधनम् । अर्थात क्षौर के अंतर्गत केश, दाढ़ी-मूँछ, नाखून आदि काटकर सजना-सँवरना आदि क्रियाएँ मानी गई हैं।
अरबी से हिंदी-उर्दू में आया हुआ "हजामत" भी लगभग ऐसा ही है। इसलिए "दाढ़ी बनाना" उपयुक्त है। ढूँढाड़ी में दाढ़ी बनाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है– सुँवार बनाना, सुँवारना। सुँवार शब्द 'सँवरने' का ही स्थानीय रूप है।