अब तो खुजाने-चुभाने के काम के रह गए...
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अमीर खुसरो को एक दिन जाने क्या सूझी कि सुबह-सुबह हत्याएं करने बैठ गए। एक-दो के नहीं, पूरे बीस के सिर उड़ा दिए लेकिन कानून तो कानून है; बीस सिरों को कलम करने के बाद भी कानून की नजर से साफ़ बच गए और लिख दिया कि सनद रहे:
" बीसों का सिर काट लिया
ना मारा ना खून किया .."
अब तो हम-आप भी यह काम कर लेते हैं और साफ बच निकलते हैं।
नाखून की व्युत्पत्ति ढूँढ़ना कठिन नहीं है। यह फ़ारसी से आया है हिंदी/उर्दू में। किंतु इसका पूर्वज यहीं का है । संस्कृत में नख की कहानी अवश्य कुछ रोचक है। इसमें वर्णों के उलटफेर का चक्कर है। नख बना है संस्कृत √खन् (खोदना) से। खोदने के उपकरणों में मनुष्य के पास प्रकृति का दिया हुआ प्राचीनतम उपकरण है, तब से जब वह वन्य पशुओं के साथ वनों में विचरण करता था। वह है उसका आदिम औजार नाखून जो मांस, फल- फूल को खोदने- नोचने के काम आता था। आपसी लड़ाई में लड़ने के भी। खन् का वर्ण विपर्यय हुआ नख में।
यही नख पुरा - भारोपीय (PIE) *h₃nogʰ- से प्राचीन ग्रीक में ओनख, लैटिन में उँगविस, अल्बानियाई में न्येल, अंग्रेजी में नेल, लिथुआनियन् में नगस्, रूसी में नगा, फ़ारसी में नाखून बनकर फिरसे भारत आ गया।
अब नाखून को विदेशी मानें या स्वदेशी?
आपने तो पूरी क्लास ले डाली । धन्यवाद ।
ReplyDeleteआज भी सबसे तेज हथियार मनुष्य के पास नाखून ही है जो उसके अपने है । किसी से उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ती । जब चाहा,जहां चाहा और जैसे चाहा व्यवहार कर सकते है ।
धन्यवाद दादा । प्रणाम