राखी और भद्रा
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ज्योतिषियों के द्वारा प्रायः हर साल राखी पर भद्रा के नाम से डरा दिया जाता है। जहाँ तक नाम का प्रश्न है भद्र शब्द की व्युत्पत्ति भद् धातु से है (भदि कल्याणे ) । अमरकोश के अनुसार भद्र के कुछ पर्याय हैं - श्रेय, शिव,कल्याण, मङ्गल, शुभ, भव्य, कुशल । इनमें कोई भी अशुभ या डरावना अर्थ देने वाला शब्द नहीं है। भद्र से ही आ (टाप्) प्रत्यय जुड़ने से बना भद्रा। तो भद्रा में डर या अशुभ अर्थ कैसे आ गया।
भद्र से तो भला होना चाहिए था किंतु ज्योतिषी उससे बचने की राय देते हैं। (हमारे वाले कह रहे थे इस साल भद्रा पाताल लोक में है लेकिन फिर भी दोपहर तक असर करेगी।) लगता है भद्रा न हुई, हमारे सरकारी "अच्छे दिन" हो गए।
वह्नि पुराण के अनुसार भद्रा छाया के गर्भ से उत्पन्न सूर्य की कन्या थी। शनिदेव और भद्रा जुड़वा भाई बहन थे।
“यमलौ तु ततस्तस्यां जनयामास भास्करः।
शनैश्चरञ्च भद्राञ्च छायायाममितद्युतिः॥"
लगता है भद्रा से डरने-डराने का कारण यही है। शनि देव को चूँकि ज्योतिषियों ने किन्हीं कारणों से डरावना बना दिया है, इसलिए उसकी जुड़वा बहन छाया को भद्रा होते हुए भी डरावना अर्थ मिलना ही था।
जहाँ तक भाषा का प्रश्न है, एक ही मूल शब्द 'भद्र' से हिंदी के दो परस्पर विलोम शब्द बने हैं- भला और भद्दा!
~भद्र > भद्रक >भल्लअ > भला;
~भद्र > भद्रक > भद्दअ> भद्दा।
यह है भाषा की महिमा।
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