Wednesday, 15 January 2025

गुड़ को प्रणाम

॥ नमो गुडाय ॥

(फोटो सौजन्य: wiki commons)


गुड द्रविड़ परिवार का शब्द माना जाता है। पालि में इसे गुळ कहा गया है, प्राकृत और संस्कृत में गुड। हिंदी में गुड़, बोलियों में गुर, गुल, गुली, गुलो भी। कुमाउँनी में रोचक स्थिति यह है कि पदार्थ का नाम तो प्राकृत गुड से है किंतु उसका स्वाद पालि गुळ से- गुळियो, गुलिय् (मीठा)। गन्ने के अतिरिक्त ताड़, महुआ और खजूर से भी गुळ/गुड़ बनाया जाता है।
आयुर्वेद में गुड़ की बड़ी महिमा गाई गई है। विशेषकर पुराने गुड़ को रसायन कहा गया है।
स पुराणोऽधिकगुणो गुडः पथ्यतमः स्मृतः॥
भाव प्रकाश के अनुसार
श्लेष्माणमाशु विनिहन्ति सदार्द्रकेण
पित्तं निहन्ति च तदेव हरीतकीभिः ।
शुण्ठ्या समं हरति वातमशेषमित्थं
दोषत्रयक्षयकराय नमो गुडाय ॥
[गुड़ को अदरक के साथ लें तो कफ दोष, हरड़ के साथ पित्त और सौंठ के साथ लेने पर वात विकार समूल नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कफ-पित्त-वात तीनों दोषों को नष्ट करने वाले गुड़ को प्रणाम।]

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