Thursday, 22 May 2025

हवस से हौसिया


हिंदी-उर्दू में हवस शब्द अरबी से आया है। मराठी, कोंकणी तथा कुछ अन्य उत्तर भारतीय आर्य भाषाओं में भी यह शब्द उपस्थित है। शब्दकोशों के अनुसार हवस का अर्थ है— वह इच्छा जिसकी संतुष्टि बराबर अथवा बार-बार की जाती हो, परंतु फिर भी जो और अधिक संतुष्टि के लिए उत्कट रूप धारण किये रहती हो। उत्कंठा, लालसा, बढ़ा हुआ शौक़, लोभ, लालच, वासना। (हिंदवी शब्दकोश)
पद्माकर कहते हैं -
सजै विभूषन बसन सब, पिया मिलन की हौस।
(सारे वस्त्राभूषणों से शृंगार कर लेने के बाद अब पिया से मिलने की हवस रह गई है!)
हवस से कुमाउँनी और मराठी में हौस बना है और हौस का विशेषण है हौसिया। कुमाउँनी की प्रवृत्ति के अनुसार स का श उच्चारण करने से होगा - हौशिया। मराठी में हौस, हौश दोनों हैं। हौसिया को हौसदार भी कहते हैं।
विकास क्रम इस प्रकार है 
हवस (ہَوَس अरबी)—> हौस > हौसिया > हौसदार।
हौसदार मराठी में भी है जिसका अर्थ है- रसिक, मौज-मस्ती का शौकीन।
"आपल्या मनाची हौस पुरविण्याचा स्वभाव असलेला।"
~ (मराठी शब्दकोश, मोल्सवर्थ)।
 कुमाउँनी में हौशिया उस रंगीन तबीयत के आदमी को भी कहते हैं जो नए-नए कपड़े पहनने का, अच्छे खाने का, मेले-ठेले में बिंदास नाचने का शौकीन हो। युवती की प्रसन्नता लोकगीत के इस मुखड़े से व्यक्त होती है 
"छुट्टी ऐ रौछ म्यर नंदू हौसिया!"
(मेरा हौसिया नंदू सेना की ड्यूटी से छुट्टी पर आया है।)

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