छुट भैया शब्द तो दो मासूम शब्दों का कर्मधारय समास है— छोटा (विशेषण ) भाई (संज्ञा)। प्यार से छोटा भाई छुटभैया हो गया। लेकिन व्यवहार में यह इतना छोटा, प्यारा और मासूम शब्द अब नहीं रहा।
ऐसा व्यक्ति जिसकी गिनती बड़े आदमियों में न होकर छोटे या साधारण लोगों में होती है। कम हैसियत का, अनुभवहीन और छोटी उम्र का बदमाश, प्रशिक्षु गुंडा, जूनियर नेता इस श्रेणी में आते हैं। लूट खसोट, हफ़्ता वसूली, तोड़फोड़ और अनेक प्रकार की गुंडई में शामिल कम उम्र के अपराधी जो किसी न किसी बड़े नेता या नामी गुंडे की आड़ में काम करते हैं, उन्हें उस नामी-गिरामी 'बड़े' का छुटभैया कहा जाता है।
छुटभैया नेताओं की ज़िंदगी एकदम बॉलीवुड फिल्मों की तरह ही होती है—अनाम और संघर्ष से भरी। कुछ छोटी मोटी करतूतों के बाद अगर बड़े नेता की नज़र में आ गए तो विधायक बनने का सपना पाले रहते हैं और मौका मिलते ही पंचायतों , सभा- समितियों, संस्थाओं के कार्यकर्ता से प्रमुख तक के पद सँभाल लेते हैं और दाँव लगा तो विधायिका या संसदों तक पहुँच जाते हैं।
एक बड़ी विडंबना भी है इस नाम के साथ।छुटभैया नेता को कोई छुटभैया नेता नहीं कहता। ये स्वयं भी अपने को इस नाम से पहचाना जाना नहीं चाहते। न खुद को इस नाम से संबोधित करते हैं, न उनके आसपास रहने वाले लोग करते हैं। वे चाहते हैं उन्हें नेताजी कहा जाए। कुछ लोग उन्हें नेता कह भी देते हैं लेकिन असली नेता के सामने नहीं।
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