Wednesday, 9 June 2021

परात


परात پرات‎)


पीतल, काँसा, ताँबा, स्टील से बना थाली के आकार का एक बड़ा बरतन परात कहलाता है, जिसका किनारा थाली के किनारे से ऊँचा होता है । यह मुख्य रूप से आटा गूँधने के, रसोई में छुटपुट संग्रह के काम आता है। कभी-कभी हाथ-पैर धोने, शादी-ब्याह या किसी और सामूहिक भोज में सामग्री संग्रह या वितरण आदि के काम में भी लाया जाता है ।

—कोउ परात कोउ लोटा लाई ।
साह सभा सब हाथ धोवाई । (जायसी)
— पानी परात को हाथ छुयौ नहिं,   नैनन के जल सों पग धोये। (नरोत्तमदास)

यह शब्द हिंदी, हिंदी क्षेत्र की सभी भाषाओं-बोलियों, नेपाली, पंजाबी, सिंधी, गुजराती, मराठी, कन्नड़ सहित अनेक भाषाओं में विद्यमान है। "परात" शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत पात्र से सहज लगती है। पात्र > परात।

कुछ इसे पुर्तगाली के pratt प्राट से भी व्युत्पन्न मानते हैं और कुछ देशज अर्थात् अज्ञात व्युत्पत्तिक मानते हैं।

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