Wednesday, 9 October 2024

लफड़ा

लफड़ा (لپھڑا)
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वहिद अंसारी बुरहानपुरी साहब फ़रमाते हैं:
"गधे को बाप कहती है ये दुनिया वक़्त पड़ने पर
अमल तू भी करे इस पर तो लफ़ड़ा हो नहीं सकता"
लफड़ा शब्द मुंबइया हिंदी से मुख्य धारा हिंदी, उर्दू में आया है। मुंबई वाले इसे गुजराती 'लफड़ो' (લફડો) से मानते हैं। 
झगड़ा-झमेला के लिए लफड़ा शब्द का अब बोलचाल में बहुत प्रयोग होने लगा है। लफड़ा को कुछ यों परिभाषित किया जा सकता है- विवाद, कहासुनी, टीका-टिप्पणी, गाली-गलौच, झगड़ा, झंझट, नोंक-झोंक, गरमा-गरमी से आरंभ होकर गुत्थम-गुत्था, जूतमपैजार, पत्थरबाज़ी, दंगा, मार-कूट तक पहुँच जाने वाले झगड़े को लफड़ा कहा जाता है।
~ मंदिर के पास लफड़ा हो गया था, दूसरे रास्ते से आना पड़ा। (दंगा)
~ बहस में मत पड़ो, लफड़ा हो जाएगा। (झगड़ा)

स्वजनों या समाज की अस्वीकृति के बावज़ूद हुए छिपे प्रेम संबंध के लिए भी लफड़ा शब्द है।
~ बॉस और उनकी सेक्रेटरी के बीच लफड़ा चल रहा है।
~ साफ-साफ बताओ, किसी लफड़े में तो नहीं पड़ गई?
ऐसे ही प्रयोगों के आधार पर एक लोक व्युत्पत्ति का दावा है कि इसे फ्रांसीसी शब्द l'affaire (अर्थात् अवैध यौन संबंध) से उधार लिया गया है। इस अर्थ में इसकी व्युत्पत्ति अंग्रेजी love से भी संभव है। लेकिन ये भ्रामक व्युत्पत्तियाँ लगती हैं।
इधर हल्के-फुल्के भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी फिल्मी गानों में लफड़ा का प्रयोग बहुत होने लगा है।
व्यक्तिगत जीवन में या समाज में शांति के लिए लफड़े से दूर रहना ही ठीक है। क्या आपका कोई लफड़ा चल रहा है?
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